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India के रत्न-आभूषण उद्योग के लिए नई उम्मीद ? अमेरिकी शुल्क संकट में अवसर और विकास की राह

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India के रत्न और आभूषण निर्यातक: अमेरिका के शुल्क प्रभाव पर पूरी जानकारी (अगस्त 2025)

 

  • पृष्ठभूमि

    • अमेरिकी शुल्क वृद्धि: 7 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25% का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया, जिससे रत्न और आभूषण पर कुल शुल्क 50% तक पहुँच गया। यह अमेरिकी व्यापारिक भागीदारों में सबसे अधिक है—जबकि वियतनाम, थाईलैंड, मैक्सिको और यूएई जैसे प्रतियोगियों को केवल 15–25% का शुल्क देना पड़ता है।

 

 

  • आर्थिक प्रभाव

    • अमेरिकी बाजार पर निर्भरता: अमेरिका,India के रत्न और आभूषण का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, जिसकी सालाना कीमत $10 बिलियन से अधिक है (वैश्विक व्यापार का लगभग 30%)। मुंबई के SEEPZ विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से लगभग 85% निर्यात अमेरिका को जाता है, जहां 50,000–100,000 लोगों को रोजगार मिलता है।

    • हीरा और आभूषण निर्यात: India के कटे और पॉलिश किए हुए हीरों के लगभग आधे निर्यात अमेरिका में होते हैं। शुल्क बढ़ने से अमेरिकी निर्यात लगभग बंद होने की स्थिति में है, जिससे छोटे कारीगरों से लेकर बड़े निर्माताओं तक सभी प्रभावित होंगे।

    • प्रतिस्पर्धा में कमी: तुर्की, वियतनाम, थाईलैंड और यूएई जैसे देशों में शुल्क काफी कम (15–20%) है, जिससे भारतीय उत्पाद कीमत में प्रतिस्पर्धी नहीं रहेंगे।

    • रोजगार और उद्योग पर असर: निर्यातकों का कहना है कि ऑर्डर घटने से भारी नुकसान और छंटनी होगी। कुछ बड़ी कंपनियां (जैसे टाइटन) निर्माण इकाइयाँ मध्य पूर्व में स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं।

    • व्यापार का पुनर्निर्देशन: चिंता है कि ऑर्डर कम शुल्क वाले देशों जैसे मैक्सिको, कनाडा, तुर्की, यूएई या ओमान के माध्यम से भेजे जा सकते हैं, जिससे पारदर्शिता पर असर पड़ेगा।

 

 

  • सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया

    • नीतिगत माँगें: जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने सरकार से तुरंत राहत देने की अपील की है:

      • अगस्त से दिसंबर 2025 तक अमेरिका के लिए निर्यात पर 25–50% शुल्क की भरपाई करने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक या रिइम्बर्समेंट स्कीम

      • MAI जैसी योजनाओं के तहत नए बाज़ार तलाशने के लिए वित्तीय सहायता (जैसे आने वाला सऊदी अरब ज्वेलरी प्रदर्शनी )

      • ब्याज भुगतान में छह महीने की मोहलत, जैसा कि कोविड-19 के समय दी गई थी।

    • निर्माण बदलाव की योजना: India निर्यातक UAE या मैक्सिको जैसे कम शुल्क वाले देशों में विनिर्माण इकाइयाँ लगाने पर विचार कर रहे हैं (UAE: 10%, मैक्सिको: 25%)।

    • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा: अमेरिका के रत्न और आभूषण उद्योग का एक प्रतिनिधिमंडल 19 अगस्त को भारत आएगा, ताकि निर्यातकों और सरकारी अधिकारियों से चर्चा हो सके।

 

  • घरेलू बाजार और विविधीकरण

    • घरेलू वृद्धि: India के आभूषण क्षेत्र में घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है। बाजार 2025 में $85 बिलियन से अगले दो वर्षों में ₹130 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है, जिससे निर्यात में आई गिरावट का कुछ हद तक मुकाबला किया जा सकेगा।

    • नए निर्यात गंतव्य: GJEPC सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व को नए बाज़ार के रूप में देख रहा है, जहां SAJEX प्रदर्शनी नए अवसर लाएगी।